रणनीतियां

बाइनरी ऑप्शन्स ट्रेडिंग के लिए गहन अनुभव की जरुरत नहीं

एक सामान्य गलत धारणा यह है कि बाइनरी ऑप्शन्स ट्रेडिंग अनुभव प्राप्त लोग ही कर सकते हैं. तथ्य यह है कि आपकी किसी पूर्व वित्तीय ट्रेडिंग अनुभव की आवश्यकता नहीं है. आमतौर पर लोग कुछ ही समय में बाइनरी ऑप्शन्स ट्रेडिंग की अवधारणा समझ जाते हैं. मूल आवश्यकता यह होती है कि जाना जाए कि किसी परिसंपत्ति की कीमत बढ़ेगी (कॉल) या घटेगी (पुट). सफल बाइनरी ऑप्शन्स ट्रेडर सरल सिद्धांतों और रणनीतियों को अपनाते हैं और 24Option जैसे भरोसेमंद ब्रोकर से सेवायें लेते हैं.

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मैं व्यक्तिगत रूप से व्यापार के लिए छह अलग दलालों का उपयोग करता हूँ और सभी गंभीर व्यापारियों को सिफारिश करूंगा कि परिसंपत्तियों की एक अच्छी किस्म का निर्माण करने के लिए अलग दलालों के साथ कुछ खाते खोलें।

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Four Steps

बाइनरी ऑप्शन्स ट्रेडिंग के लिए गहन अनुभव की जरुरत नहीं

एक सामान्य गलत धारणा यह है कि बाइनरी ऑप्शन्स ट्रेडिंग अनुभव प्राप्त लोग ही कर सकते हैं. तथ्य यह है कि आपकी किसी पूर्व वित्तीय ट्रेडिंग अनुभव की आवश्यकता नहीं है. आमतौर पर लोग कुछ ही समय में बाइनरी ऑप्शन्स ट्रेडिंग की अवधारणा समझ जाते हैं. मूल आवश्यकता यह होती है कि जाना जाए कि किसी परिसंपत्ति की कीमत बढ़ेगी (कॉल) या घटेगी (पुट). सफल बाइनरी ऑप्शन्स ट्रेडर सरल सिद्धांतों और रणनीतियों को अपनाते हैं और 24Option जैसे भरोसेमंद ब्रोकर से सेवायें लेते हैं.

जोखिम कैसे घटाएं

हमारा उद्देश्य आपको ऐसी रणनीतियां प्रदान करना है जिनका इस्तेमाल करके आप अपने लाभ बढ़ा सकें. ये सरल तकनीकें होती हैं जो आपको कुछ ख़ास सिग्नलों को पहचानने में मदद करती हैं जिससे आपको बाइनरी ऑप्शन्स ट्रेडिंग में सही दांव लगाने में मदद मिलती है. जोखिम को घटाना हर ट्रेडर के लिए महत्वपूर्ण है और कुछ सिद्धांतों का प्रयोग कर जोखिमों को कम किया जा सकता है. बाइनरी ऑप्शन्स ट्रेडिंग में अनेक खतरे संभव हैं किन्तु निम्न पर भली प्रकार से विचार करके आप उन्हें कम कर सकते हैं.

  • एक ही बार में अपना पूरा पैसा ना झोंक दें
  • निवेश से पहले ट्रेडिंग एसेट (परिसंपत्ति) के बारे में समझ विकसित करें
  • रणनीति पर काम करते हुए अपनी पूंजी का मात्र 5 से 10 प्रतिशत ही प्रति सौदे पर निवेश करें

रणनीतियां

बाइनरी ऑप्शन्स ट्रेडिंग में चुनने के लिए कई एसेट्स/परिसंपत्तियां हैं. तथापि जोखिम को कम रखने का सबसे पुराना और सबसे प्रभावी तरीका है, एक एसेट पर ध्यान केन्द्रित रखना. उन एसेट्स में trade करें जिनसे आप भली भांति परिचित हैं जैसे यूरो-डॉलर विनिमय दर. लगातार इस पर ट्रेडिंग करते हुए आपको इसकी समझ उत्पन्न हो जाएगी और आपके लिए कीमत की दिशा का पता करना कुछ आसान हो जाएगा. नीचे दो तरह की रणनीतियां समझाई गयी हैं जो बाइनरी ऑप्शन्स ट्रेडिंग में खासी फायदेमंद साबित हो सकती हैं.

1. ट्रेंड/प्रवृत्ति रणनीति

यह एक ऐसी रणनीति है जो नए और पुराने सभी ट्रेडर्स द्वारा अपनाई जाती है. यह रणनीति बुल-बेअर रणनीति भी कहलाती है और इसमें एसेट की बढ़त, घटत या सपाट रहने के इतिहास का अध्ययन किया जाता है और उसके आधार पर प्रवृत्ति का पता लगाया जाता है. यदि प्रवृति रेखा (ट्रेड लाइन) सपाट है और अनुमान आया है कि एसेट की कीमत बढ़ेगी तो नो टच आप्शन ही ठीक रहेगा.

यदि प्रवृत्ति रेखा बतलाती है कि एसेट बढेगा तो कॉल चुनें.Call

यदि प्रवृत्ति रेखा एसेट की कीमत में घटत बतलाती है तो पुट चुनें.Put

यह तरीका काल/पुट आप्शन की अताढ़ ही काम करता है बस एक फर्क है कि आप वह कीमत चुनते हैं जिस पर चुनी गयी अवधि में एसेट ना पहुंचे. उदाहरण के लिए गूगल की शेयर कीमत $540 है और ट्रेडिंग प्लेटफार्म 77% लाभ के साथ $570 की नो टच कीमत पर है. यदि निर्दिष्ट अवधि के बाद कीमत $570 नहीं पहुंचती तो लाभ प्राप्त होता है.

2. पिनोशियो रणनीति

यह रणनीति तब काम में ली जाती है जब एसेट की कीमत में जबरदस्त उछाल या गिरावट का अनुमान हो. यदि कीमत के बढ़ने की उम्मीद हो तो कॉल चुनें और अगर कीमत के गिरने का अनुमान हो तो पुट का चुनाव करें. ब्रोकर द्वारा दिए गए डेमो खाते पर आप इसका अभ्यास कर सकते हैं.Pinocchiostrategia

3. स्ट्रेडल (तेजी-मंदी) रणनीति

यां रणनीति बाज़ार में अनिश्चितता और किसी स्टॉक विशेष के सम्बन्ध में महत्वपूर्ण खबर के ठीक पहले या जब विश्लेषकों के अनुमानों की बाढ़ आई हुई हो, ऐसी स्थिति में सर्वश्रेष्ट काम करती है. पूरे विश्व के ट्रेडिंग समुदाय में इस रणनीति का चलन है. इस रणनीति में ट्रेडर को कॉल और पुट दोनों ऑप्शन्स से बचना होता है और चुने गए एसेट पर दोनों आप्शन लगाने होते हैं.

इसके पीछे विचार यह है कि यदि कीमतें ऊपर जाएँ तो पुट आप्शन काम में लिया जाए क्योंकि ऐसी सूचना या विश्वास या इंगित होता है कि कीमतें जल्दी ही गिरेंगी. जब कीमतें गिरना शुरू होती हैं तब कॉल आप्शन लिया जाता है और उम्मीद की जाती है कि कीमतें जल्दी ही बढेंगी. कम कीमत के एसेट पर कॉल लेकर और बढ़ते एसेट पर पुट लेकर भी यह रणनीति इस्तेमाल की जाती है. इससे किसी एक ट्रेड आप्शन में सफलता के अवसर बेहद बढ़ जाते हैं. ट्रेडर्स इस रणनीति को बाज़ार में या किसी एसेट विशेष की कीमत में निरंतर उतार-चढाव की स्थितियों में काम में लेना बेहद पसंद करते हैं.

4. जोखिम व्युत्क्रम (रिवर्सल) रणनीति

अनुभवी वैश्विक बाइनरी ट्रेडर्स के बीच यह रणनीति खासी लोकप्रिय है. यह ट्रेडिंग से जुड़े जोखिमों को घटाने पर ध्यान केन्द्रित करती है और सफल परिणामों के अवसर बढ़ाती है जिससे लाभ के अवसर बढ़ते हैं. इस रणनीति में किसी एक मूल एसेट पर एक साथ कॉल और पुट आप्शन खरीदे जाते हैं. अस्थिर कीमतों वाले एसेट को ट्रेड करने के मामले यह रणनीति विशेषकर लाभप्रद है. स्वाभाविक तौर पर, बाइनरी ऑप्शन्स में दो संभव परिणाम होते हैं और दोनों परिणामों पर trade करने से किसी एक की सफलता की गारंटी होती है.

5. हेजिंग (बचाव) रणनीति

यह रणनीति आम भाषा में जोड़े बनाने की रणनीति कहलाती है और जोखिमों को कम करने के लिए निवेशकों, निगमों, ट्रेडर्स आदि द्वारा काम में ली जाती है. इस रणनीति में किसी एक ही एसेट पर एक ही समय कॉल और पुट आप्शन खरीदे जाते हैं. इससे एसेट की कीमत चाहे जिस दिशा में जाए आप सुरक्षित रहते हैं क्योंकि किसी भी दिशा में जाने पर आप उस ओर फायदा कमा लेंगे. यह आपके लिए एक तरह का बीमा है.

6. आधारभूत (फंडामेंटल) विश्लेषण

यह रणनीति स्टॉक ट्रेडिंग के समय अपनाई जाती है और खासकर उन ट्रेडर्स द्वारा इस्तेमाल की जाती है जो अपने चुने हुए एसेट्स/ परिसंपत्तियों की बेहतर समझ पाना चाहते हैं. इससे उन्हें भावी कीमत परिवर्तनों को समझने में मदद मिलती है और वे अधिक सटीकता से अपने अनुमान लगा पाते हैं. इस विश्लेषण में कंपनी के सभी वित्तीय पक्षों की गहन समीक्षा-परीक्षा करना सम्मिलित होता है. आय की रपटें, बाज़ार हिस्सा और वित्तीय रपटों पर ख़ास ध्यान दिया जाता है. इस समीक्षा से ट्रेडर परिसंपत्ति की विगत गतिविधि को बेहतर तरीके से समझ पाता है और कतिपय वित्तीय या आर्थिक बदलावों के मामलों में इसमें आये बदलावों को भी वह बेहतर समझ पाता है. इस समीक्षा से ट्रेडर परिचित परिस्थितिओं में भावी ट्रेडिंग रणनीतियों हेतु मजबूत अनुमान लगा सकने में मदद महसूस करता है. ध्यान दें, कि एक अच्छा बाइनरी ट्रेडिंग रोबोट इस्तेमाल करके आप इन चरणों की जरुरत को लगभग पूरी तरह से छोड़ सकते हैं.

अभ्यास करने का सबसे बढ़िया तरीका है कि उपलब्ध कई ब्रोकर्स में से किसी एक के साथ मुफ्त डेमो खाता खोलें.

संदर्भ / इसके अलावा पढ़ना:

  1. APPROACHES TO PALAEO-INDIAN ECONOMY: AN ONTARIO AND GREAT LAKES PERSPECTIVE (Lawrence Jackson)
  2. THE GROWTH OF THE INDIAN ECONOMY: 1860–1960 (Krishan Saini)
  3. A Nation in Transition: Understanding the Indian Economy (Jayshree Sangupta)
  4. Leveraging which knowledge in the globalization era? Indian facet (Rajesh Pillania)
  5. Information Technology Improving Retail Marketing In Agriculture (A. Matania)
  6. Contributions of Small-Scale Industrial (SSI) Sector in the Indian Economy (Andrew Dutta)
  7. Liberalisation and Globalisation of Indian Economy, Volume 7 (Ed. Gupta)
  8. Indian Development Strategy: Some Comments (Jadwish B.)
  9. Small-Scale Industries in Indian Economy: A Quantitative Appraisal (Dixit Annapurpa)
  10. Effects of Transition Economy on the Market Orientation-Business Performance Link (Satyendra P.)
  11. Crisis of the Indian Economy: Is There a Recovery under the New Economic Policy? (Prabirjit S.)
  12. A STUDY ON THE IMPACT OF FDI INFLOWS ON EXPORTS AND GROWTH OF AN ECONOMY (Barua Rashmita)
  13. Women Entrepreneurs in the Indian Agricultural Sector (Ashish Matur)
  14. 400: International Economics
  15. Applying the congruence model of organisational change in explaining the change in the Indian economic policies (Karabi Bezboruah)
  16. Quality management practices in Indian service firms (Kunal Banerji)

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    1 comment

    1. Ansa2w1   •  

      परिणामों से वास्तव में संतुष्ट! हम सभी जानते हैं कि जब बैंक और वित्तीय व्यवस्था की बात हो तो स्विट्ज़रलैंड निवासी कितने बढ़िया होते हैं. यह भी मुख्य कारण था जो मैंने इस खास सेवा से जुड़ने का निर्णय किया. शानदार लेख हेतु धन्यवाद. मैं अपना सकारात्मक अभिमत दे सकता हूँ और मैं सेवा की अत्यधिक अनुशंसा करता हूँ.

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